णाणं करेदि पुरिसस्स गुणे इंदियकसायविजयेण ।
बलरूववण्णमाऊ करेहि जुत्तो जधाहारो॥1347॥
इन्द्रिय तथा कषाय विजय से ज्ञान मनुज में गुण करता ।
विष विहीन उत्तम भोजन से रूप तेज बल आयु बढ़े॥1347॥
अन्वयार्थ : मनुष्य का ज्ञान भी इन्द्रिय कषायों पर विजय करनेवाले को गुणकारक है । जैसे योग्य आहार, बल, रूप, तेज, वर्ण, आयु को विस्तीर्ण करता है/बढाता है ।

  सदासुखदासजी