
ते चेव इंदियाणं दोसा सव्वे हवंति णादव्वा ।
कामस्स य भोगाण य जे दोसा पुव्वणिद्दिट्ठा॥1359॥
पहले कहे हुए जो काम-भोग से होनेवाले दोष ।
इन्द्रिय की लोलुपता से होते हैं वैसे ही सब दोष॥1359॥
अन्वयार्थ : जो दोष पूर्व में काम के तथा भोगों के कहे गये हैं, वे सभी दोष इन्द्रियों के विषयों से होते हैं, ऐसा जानना चाहिए ।
सदासुखदासजी