सरजुए गंधमित्तो घाणिंदियवसपदो विणीदाए ।
विसपुप्फगंघमग्घाय मदो णिरयं च संपत्तो॥1363॥
सरयू में नृप गन्ध मित्र घ्राणेन्द्रिय के वश में होकर ।
विषमय पुष्प सुगन्ध सूँघकर मरा और वह गया नरक॥1363॥
अन्वयार्थ : विनीता नगरी का गंधमित्र नाम का राजा घ्राणेन्द्रिय के वश सरयू नदी के तट पर विष के पुष्प की गंध सूँघकर मरण कर नरक में गया ।

  सदासुखदासजी