पाडलिपुत्ते पंचालगीद सद्देण मुच्छिदा संती ।
पासादादो पडिदा णठ्ठा गंधव्वदत्ता वि॥1364॥
पंचाल गति के शब्द श्रवणकर मूर्च्छित होकर वह गणिका ।
पाटलिपुत्र नगर में गिरी महल से नीचे मरण हुआ॥1364॥
अन्वयार्थ : पाटलीपुत्र नगरी में पंचाल नाम के गायनाचार्य के मधुर गीत सुनकर मोहित हुई गंधर्वदत्ता नाम की स्त्री महल से गिरकर मरण को प्राप्त हो गई ।

  सदासुखदासजी