माणुसमंसपसत्तो कंपिल्लवदी तधेव भीमो वि ।
रज्जब्भट्ठो णठ्ठो मदो य पच्छा गदो णिरयं॥1365॥
नगर कंपिला नृपति भीम था मांस लोलुपी मानव का ।
उसे निकाला गया राज्य से वह भी मरकर नरक गया॥1365॥
अन्वयार्थ : कांपिल्य नगर का भीम नामक राजा मनुष्य के मांस भक्षण में आसक्त होकर राज्य से भ्रष्ट हुआ और मरकर नरक की महा वेदना को प्राप्त हुआ ।

  सदासुखदासजी