फासिंदिएण गोवे सत्ता गहवदिपिया वि णासक्के ।
मारेदूण सपुत्तं धूयाए मारिदा पच्छा॥1367॥
कामेन्द्रिय वश गृह-पति नारी ग्वाले में आसक्त हुई ।
उसने अपने सुत को मारा किन्तु सुता के हाथ मरी॥1367॥
अन्वयार्थ : नासिक्य नगर में गृहपति की पापी स्त्री ने स्पर्शन इन्द्रिय के विषय में ग्वाले में आसक्त होकर अपने पाप को छिपाने के लिये अपने पुत्र को मार डाला । इस कुकृत्य से कुपित हुई खुद की पुत्री द्वारा स्वयं भी मारी गई और नरक को प्राप्त हुई ।

  सदासुखदासजी