पुरिसो मक्कडसरिसो होदि सरूवो वि रोसहदरूवो ।
होदि य रोसणिमित्तं जम्मसहस्सेसु य दुरूवो॥1377॥
रूपवान नर भी हो जाता बन्दर जैसा बने कुरूप ।
इस भव में यदि क्रोध करे तो सहस जन्म में बने कुरूप॥1377॥
अन्वयार्थ : सुन्दर रूपवान पुरुष भी क्रोधित होने पर, हना गया है रूप जिसका ऐसे बंदर जैसा लाल मुख वाला लगता है तथा विपरीत आकृति को प्राप्त होता है । क्रोध करने से आगामी हजारों, लाखोंे, करोडों जन्मों पर्यंत कुरूप - बदसूरत हो जाता है ।

  सदासुखदासजी