
वारवदीय असेसा दड्ढा दीवायणेण रोसेण ।
वद्धं च तेण पावं दुग्गदिभयबंधणं घोरं॥1382॥
दीपायन मुनि ने क्रोधित हो नगरी करी द्वारिका भस्म ।
दुर्गति में ले जानेवाले घोर पाप का किया कुबन्ध॥1382॥
अन्वयार्थ : द्वीपायन1 मुनि ने क्रोध में आकर संपूर्ण द्वारिका नगरी को जला डाला था, उस क्रोध के कारण दुर्गति के भय का कारण ऐसा घोर पाप का बंध किया ।
सदासुखदासजी