दट्ठूण अप्पणादो हीणो मुक्खाउ विंति माणकलिं ।
दट्ठाण अप्पणादो अधिए माणं ण यंति बुधा॥1384॥
खुद से हीन जनों को लखकर मूर्ख लोग करते हैं मान ।
किन्तु स्वयं से उच्च जनों को देख मान हरते विद्वान॥1384॥
अन्वयार्थ : जो मूर्ख होता है, वह अन्य व्यक्ति को अपने से हीन देखकर मानरूप कालिमा को वहन/करता है और ज्ञानीजन हैं, वे अपने से अधिक व्यक्ति को देखकर अभिमान नहीं करते ।

  सदासुखदासजी