माणी विस्सो सव्वस्स होदि कलह भयवेर दुक्खणि ।
पावदि माणी णियदं इहपरलोए य अवमाणं॥1385॥
मानी से सब द्वेष करें वह कलह बैर भय दुख का पात्र ।
इस भव एवं परभव में वह निश्चित हो अपमान कुपात्र॥1385॥
अन्वयार्थ : अभिमानी व्यक्ति समस्त लोकों का वैरी होता है एवं द्वेष का पात्र बनता है और अभिमानी पुरुष इस लोक में कलह, भय, वैर और दु:खों को प्राप्त होता है तथा परलोक में निश्चय से अनेक भवों में अपमान को पाता है ।

  सदासुखदासजी