सट्ठिं साहस्सीओ पुत्त सगरस्स रायसीहस्स ।
अदिबलवेगा संता णट्ठा माणस्स दोसेण॥1389॥
सगर चक्रवर्ती के साठ हजार महा बलशाली पुत्र ।
मान दोष के कारण ही वे सभी मृत्यु को प्राप्त हुए॥1389॥
अन्वयार्थ : अभिमान के दोष से सगर चक्रवर्ती के साठ हजार पुत्रों को अति बल का गर्व बहुत था । वे गर्व के कारण नष्ट हुए । इस प्रकार सात गाथाओं में मान कषाय का स्वरूप कहा ।

  सदासुखदासजी