
पावइ दोसं मायाए महल्लं लहु सगावराधेवि ।
सच्चारण सहस्साण वि माया एक्का वि णासेदि॥1392॥
मायावी का लघु अपराध कहा जाता है दोष महान ।
एक बार की मायाचारी करे हजार सत्य का नाश॥1392॥
अन्वयार्थ : अत्यंत अल्प अपराधी भी मायाचार के कारण शीघ्र ही महान दोषों को प्राप्त होता है । एक ही मायाचार हजारों सत्यों का नाश करता है ।
सदासुखदासजी