सव्वे वि गंथदोसा लोभकसायस्स हुंति णादव्वा ।
लोभेण चेव मेहुणहिंसालियचोज्जमाचरदि॥1401॥
परिग्रह के सब दोष कहे जो वे ही लोभी को होते ।
हिंसा झूठ कुशील तथा चोरी भी लोभी नर करते॥1401॥
अन्वयार्थ : परिग्रह रूपी संताप युक्त लोभी मनुष्य के सकल दोष होते हैं । लोभी व्यक्ति हिंसा, झूठ, चोरी और मैथुन - इन पापों में प्रवृत्त होता है ।

  सदासुखदासजी