
रामस्स जामदग्गिस्स वजं घित्तूण कत्तविरिओ वि ।
णिधणं पत्तो सकुलो ससाहणो लोभदोसेण॥1402॥
जमदग्नि सुत परसराम की कार्तिकेय ने गाय हरी ।
तीव्र लोभ से सपरिवार अरु सेना की भी मृत्यु हुई॥1402॥
अन्वयार्थ : एक लोभ के दोष से राम को तथा यामदग्न्य को वस्त्र-ग्रहण करके कार्तवीर्य नामक राजा अपने कुल एवं सेनासहित मरण को प्राप्त हुआ । इसकी पूर्ण कथा प्रथमानुयोग के ग्रन्थों से जानना । संक्षेप इतना है कि जमदग्नि नाम का मिथ्या तापसी अपनी रेणुका स्त्री और श्वेतराम तथा महेन्द्रराम नाम के दो पुत्रों सहित वन में रहता था । एक दिन कार्तवीर्य राजा वन में हाथी पकडने आया था । वह थककर जमदग्नि की कुटी में आराम करने लगा । वहाँ रेणुका ने मिष्ठान्न खिलाया, वह मिष्ठान उसने कामधेनु से प्राप्त किया था । यह सुनकर राजा कार्तवीर्य जमदग्नि को मारकर कामधेनु का हरण कर ले गया । यह बात जब जमदग्नि के दोनों पुत्रों को पता चली तो उन्होंने राजा को सेना सहित मार डाला । इस प्रकार छह गाथाओं में लोभ का वर्णन किया ।
सदासुखदासजी