
इंदियकसायदुद्दंतस्सा पाडेंति दोसविसमेसु ।
दुखावहेसु पुरिसे पसढिलणिव्वदेखलिया हु॥1404॥
दुर्जय विषय-कषाय अश्व को वश करती वैराग्य लगाम ।
यदि लगाम ढीली हो तो नर गिरता दुःखद विषम-स्थान॥1404॥
अन्वयार्थ : जो वैराग्यरूपी लगाम से रहित हैं - ऐसे कषाय और इन्द्रियरूपी दुष्ट घोडे बलवान पुरुष को भी दोष रूपी दुर्गम - विषम स्थानों में पटक देते हैं ।
सदासुखदासजी