धिदिखेडएहिं इंदियकंडे ज्झाणवरसत्ति संजुत्ता ।
फेडंति समणजोहा सुणाणदिठ्ठीहिं दट्ठूण॥1409॥
धैर्य फलक अरु ध्यानरूप शक्ति से युक्त श्रमण योद्धा ।
सम्यग्ज्ञान दृष्टि से लखकर इन्द्रिय शर वारण करता॥1409॥
अन्वयार्थ : ध्यानरूप श्रेष्ठ शक्ति से संयुक्त श्रमणरूप योद्धा इन्द्रियरूप बाणों को सम्यग्ज्ञानरूप दृष्टि से देखकर धैर्यरूप खेट/आयुध - तलवार से छेदते हैं, रोकते हैं ।

  सदासुखदासजी