इंदियकसायहत्थी वयवारिमदीणिदा उवायेण ।
विणयवरत्ताबद्धा सक्का अवसा वसे कादंु॥1417॥
विषय-कषाय गयन्द महा स्वच्छन्द किन्तु व्रत बाड़े में ।
विनय रज्जु से विधिपूर्वक बाँधें तो हो सकते वश में॥1417॥

  सदासुखदासजी