इंदियकसायहत्थी वोलेदुं सीलफलियमिच्छंता ।
धीरेहिं रुंभिदव्वा धिदिजमलारुप्पहारेहिं॥1418॥
शीलरूप अर्गला1 लाँघना चाहें विषय-कषाय गयन्द ।
कर्ण निकट कर धैर्य-प्रहार उन्हें रोकते धीर पुरुष॥1418॥

  सदासुखदासजी