इंदियकसायहत्थी दुस्सीलवणं जदा अहिलसेज्ज ।
णाणंकुसेण तइया सक्का अवसा वसं कादुं॥1419॥
इन्द्रिय और कषायरूप हाथी जो यदि कुशील वन में ।
जाना चाहें, ज्ञान रूप अंकुश से कर सकते वश में॥1419॥
अन्वयार्थ : जो किसी के वश में नहीं होते हैं ऐसे अवश कषाय और इन्द्रियरूपी हाथी व्रतरूपी बंधन स्थान में ले जाकर विनयरूपी रस्सी से बाँध दिये जाने पर वश में हो जाते हैं ।

  सदासुखदासजी