जे आसि सुभा एणिंह असुभा ते चेव पुग्गला जादा ।
जे आसि तदा असुभा ते चेव सुभा इमा इण्हि॥1424॥
पहले जो अच्छे लगते थे वही विषय अब बुरे लगें ।
और पूर्व में बुरे लगें जो वे ही अब अच्छे लगते॥1424॥
अन्वयार्थ : जो पुद्गल इस वर्तमान काल में अशुभ लगते हैं, वे ही पूर्व काल में अनंतबार सुखकारी शुभ हुए थे ।

  सदासुखदासजी