पं-सदासुखदासजी
इह य परत्त य लोए दोसे बहुगे य आवहइ चक्खू ।
इदि अप्पणो गणित्ता णिज्जेदव्वो हवदि चक्खू॥1427॥
इस भव एवं पर-भव में भी करते हैं चक्षु बहु दोष ।
यह विचारकर चक्षु इन्द्रिय विजय करें टालें सब दोष॥1427॥
अन्वयार्थ :
नेत्र इन्द्रिय को जीतना चाहिए ।
सदासुखदासजी