
लोभे कए वि अत्थो ण होइ पुरिसस्स अपडिभोगस्स ।
अकएवि हवदि लोभे अत्थो पिडभोगवंतस्स॥1445॥
पुण्यहीन नर को न मिले धन चाहे कितना लोभ करे ।
पुण्यवान नर को धन मिलता करे न किंचित् लोभ अरे॥1445॥
अन्वयार्थ : लोभ करने पर भी भाग्यहीन पुरुष के धन प्राप्त नहीं होता और भाग्यवान पुरुष के लोभ नहीं करने पर भी धन का संचय होता है ।
सदासुखदासजी