+ अब निद्रा पर विजय करने के उपाय को दश गाथाओं में दर्शाते हैं- -
णिद्दं जिणहि णिच्चं णिद्दा हु णरं अचेयणं कुणइ ।
वट्टिज्ज हु पासुत्तो खवओ सव्वेसु दोसेसु॥1448॥
निद्रा को वश करो सदा यह करे अचेतन इस नर को ।
सोये गहरी नींद क्षपक तो हो प्रवृत्ति सब दोषों में॥1448॥
अन्वयार्थ : भो क्षपक! तुम निद्रा को जीतो, क्योंकि निद्रा मनुष्य को अचेतन-सा बना देती है, योग्यायोग्य के विवेकरहित कर देती है, निद्रा को प्राप्त हुआ क्षपक/मुनि, वह हिंसादि समस्त दोषों में प्रवृत्ति करता है ।

  सदासुखदासजी