
अप्पो वि तवो बहुगं कल्लाणं फलइ सुप्पओगकदो ।
जह अप्पं वडबीअं फलइ वडमणेयपारोहं॥1468॥
छोटा-सा वट बीज फले बहु शाखा और प्रशाखा में ।
इसी तरह सुप्रयुक्त अल्प तप भी फलता है भव-भव में॥1468॥
अन्वयार्थ : उज्ज्वल उपयोग से/पवित्र परिणामों से किया गया अल्प तप भी बडे भारी कल्याण को करता है । जैसे अति छोटा बड का बीज बहुत-सी शाखा-उपशाखाओं से युक्त वटवृक्ष रूप फलता है ।
सदासुखदासजी