
सुठ्ठु कदाण वि सस्सादीणं विग्घा हवंति अदिबहुगा ।
सुठ्ठु कदस्स तवस्स पुण णत्थि कोइ वि जए विग्घो॥1469॥
धान्यादिक की खेती करें सम्हलकर फिर भी आते विघ्न ।
लेकिन सम्यक् तप करने से कभी न कोई आते विघ्न॥1469॥
अन्वयार्थ : भली विधि द्वारा - हल द्वारा भूमि को पहले जोतकर अच्छी तरह वर्षा आदि के होने पर बयिढया बीज बोने पर भी फसल आने में तो कदाचित् अनेकों विघ्न उत्पन्न होते भी हैं, परंतु सम्यक् परिणाम पूर्वक किये गये तप के बीच में कोई विघ्न जगत में आते ही नहीं ।
सदासुखदासजी