जणणमरणादिरोगादुरस्स सुतवो वरोसधं होदि ।
रोगादुरस्स अदिविरियमोसधं सुप्पउत्तं वा॥1470॥
यदि रोगी को भली भाँति औषधि दें तो वह गुणकारी ।
वैसे जन्म-मरण रोगों की औषधि तप है गुणकारी॥1470॥
अन्वयार्थ : जैसे भली प्रकार यत्नपूर्वक दी गई अत्यंत शक्तिशाली औषधि रोग से पीडित व्यक्ति के रोग का नाश कर देती है । तैसे ही जन्म-मरण रोग से पीडित प्राणी को सम्यक्तप ही जन्म-मरण रूप रोग को मेटने के लिये परम औषधि है ।

  सदासुखदासजी