
कामदुहा वरधेणूू णरस्स चिंतामणिव्व होइ तओ ।
तिलओव्व णरस्स तओ माणस्स विहूसणं सुतओ॥1474॥
सम्यक् तप है कामधेनु एवं चिन्तामणि रत्न-समान ।
मान प्रतिष्ठा का आभूषण मानव मस्तकतिलक-समान॥1474॥
अन्वयार्थ : यह तप मनुष्य के ललाट पर सुन्दर तिलक के समान सम्पूर्ण आभूषणों में प्रधान है । यह सम्यक्तप लोकमान्य जनों के सम्मान का भूषण है ।
सदासुखदासजी