
विसयमहापंकाउलगड्डहाए संकमो तवो होइ ।
होइ य णावा तरिदुं तवो कसायातिचवलणादिं॥1476॥
विषय-कीच से भरे गर्त से बाहर निकल सकें तप से ।
तीव्र कषाय नदी से पार उतर सकते तप-नौका से॥1476॥
अन्वयार्थ : पंचेन्द्रियों के विषय रूपी महाकर्दम से भरे गड्ढे में फँसे इस संसारी जीव को निकालने वाला एक तप ही है और कषायरूपी अति चपल नदी से पार होने के लिये एक तप ही नाव है ।
सदासुखदासजी