अप्पा णिच्छरदि जहा परमा तुट्ठी य हवदि जह तुज्झ ।
जह तुज्झ य संघस्स य सफलो हु परिस्समो होइ॥1491॥
जैसे हो संसार पार अरु प्रभो! आपको हो सन्तोष ।
परिश्रम होवे सफल आपका और संघ को भी हो तोष॥1491॥

  सदासुखदासजी