एवं तुज्झं उबएसमिदमासादइत्तु को णाम ।
बीहेज्ज छुहादीणं मरणस्स वि कायरो वि णरो॥1494॥
प्रभो! आपका उपदेशामृत पी करके फिर एेसा कौन ।
होगा कायर पुरुष जो डरे भूख प्यास अरु मृत्यु से॥1494॥
अन्वयार्थ : हे भगवन्! आपके पावन उपदेशरूपी अमृत को पीकर ऐसा कौन कायर पुरुष है, जो क्षुधा-तृषा आदि परीषह तथा मरण से डरेगा? कोई भी नहीं डरेगा । निश्चय से ये मुझे हैं ही नहीं ।

  सदासुखदासजी