तो तस्स तिगिंछा जाणएण खवयस्स सव्वसत्तीए ।
विज्जादेसेण वसे पडिकम्मं होइ कायव्वं॥1506॥
अतः चिकित्सा-विज्ञ गणी खुद सर्व शक्ति से मुनिवर की ।
या विचारकर वैद्य जनों से वैयावृत्ति करें उनकी॥1506॥
अन्वयार्थ : इसलिए क्षपक की चिकित्सा विधि को जानने वाले वैद्य के उपदेशानुसार सम्पूर्ण शक्ति से प्रतीकार करना योग्य है ।

  सदासुखदासजी