उब्भासेज्ज व गुणसेढी दो उदरणबुद्धिओं खवओ ।
छठ्ठं दोच्चं पढमं वसिया कुंंटिलिदपदमिछंतो॥1512॥
कहे अयोग्य वचन संयम च्युत हो नीचे गिरना चाहे ।
निशि-भोजन पानक या दिन में वह असमय भोजन चाहे॥1512॥

  सदासुखदासजी