
एवं सारिज्जंतो कोईर् कम्मुवसमेण लभदि सदिं ।
तह य ण लब्भिज्ज सदिं कोई कम्मे उदिण्णम्मि॥1517॥
याद दिलायें तो कोई कर्माेपशम से स्मृति1 पाये ।
किन्तु उदय हो कमाब का तो स्मृति लाभ नहीं पाये॥1517॥
अन्वयार्थ : इस प्रकार सविचार भक्तप्रत्याख्यान मरण के चालीस अधिकारों में सारणा नामक चौंतीसवाँ अधिकार उन्नीस गाथाओं में पूर्ण किया ।
सदासुखदासजी