तस्स पदिण्णामेरं भित्तुं इच्छंतयस्स णिज्जवओ ।
सव्वादरेण कवयं परीसहणिवारणं कुज्जा॥1522॥
यदि वह भंग-प्रतिज्ञा करना चाहे तो निर्यापक सूरि ।
आदर पूर्वक परिषह रोधक रक्षक-कवच लगाएँ सूरि॥1522॥
अन्वयार्थ : प्रतिज्ञारूप मर्यादा भंग करने के इच्छुक उस क्षपक के निर्यापकाचार्य द्वारा परीषह निवारण करने में समर्थ कवच सर्व आदरपूर्वक पहनाना चाहिए ।

  सदासुखदासजी