
को णाम भडो कुल जो माणी थोलाइदूण जणमज्झे ।
जुज्झे पलाइ आवडिदमेत्तओ चेव अरिभीदो॥1527॥
कौन स्वाभिमानी कुलीन भट ताल ठोक कर रण भू में ।
जाकर भी, अरि सन्मुख आने पर डरकर रण से भागे॥1527॥
अन्वयार्थ : जन-समुदाय में भुजाओं का आस्फालन/फैला करके गर्वपूर्वक जो युद्ध की प्रतिज्ञा करता है, वह मानी सुभट रणसंग्राम में शत्रु से भयवान होकर भाग जाता है क्या? कुलवान सुभटपना का अभिमानी तो वैरी को पीठ नहीं दिखायेगा ।
सदासुखदासजी