
जो गच्छिज्ज विसादं महल्लमप्पं व आवदिं पत्तो ।
तं पुरिसकादरं विंति धीरपुरिसा हु संढुत्ति॥1544॥
जो छोटी या बड़ी विपत्ति आने पर व्याकुल होते ।
उस कायर मानव को धीर पुरुष नपुंसक हैं कहते॥1544॥
अन्वयार्थ : जो पुरुष छोटी-बडी विपत्ति - आपदा आने पर खेद करता है, उसे धीरवीर पुरुष कायर - डरपोक कहते हैं अथवा तो नपुंसक कहते हैं ।
सदासुखदासजी