
णाबाए णिव्वुडाए गंगामज्झे अमुज्झमाणमदी ।
आराधणं पवण्णो कालगओ एणियापुत्तो॥1552॥
एणिक पुत्र नाम के साधु गंगा में जब डूबी नाव ।
मोह रहित हो मृत्यु प्राप्त कर आराधना करी सुखकार॥1552॥
अन्वयार्थ : एणिक पुत्र नाम के साधु नौका में आरोहण कर गंगा नदी पार कर रहे थे, मध्य में नौका डूब गयी । उस वक्त उन मुनिराज ने मोहरहित हो चार आराधना पूर्वक मरण किया, कायरता नहीं लाये और शाश्वत धाम मोक्ष को प्राप्त हुए । इसलिए भो कल्याण के अर्थी ! तुम्हें दु:ख में धैर्य धारण कर आत्महित में सावधान होना उचित है ।
सदासुखदासजी