कोसंबीललियघडा वूढा णइपूरएण जलमज्झे ।
आराधणं पवण्णा पावोवगदा अमूढमदी॥1554॥
ललित घटादिक बत्तिस मुनि कौशाम्बी में सरिता के बीच ।
डूब गये पर मोह रहित हो उत्तमार्थ को प्राप्त हुए॥1554॥
अन्वयार्थ : कौशांबी नगरी में ललितघटा नाम से प्रसिद्ध जो बत्तीस महामुनि थे, वे जल के मध्य नदी के प्रवाह में डूब गये तो भी मोहरहित होकर प्रायोपगमन संन्यास को धारण कर आराधना को प्राप्त हुए ।

  सदासुखदासजी