
रोहेडयम्मि सत्तीए हओ कोंचेण अग्गिदइदो वि ।
तं वेयणमधियासिय पडिवण्णो उत्तमं अट्ठं॥1558॥
नगर रोहतक क्रोंच नृपति ने शक्ति शस्त्र से किया प्रहार ।
अग्नि नृपति का पुत्र वेदना सहकर प्राप्त किया परमार्थ॥1558॥
अन्वयार्थ : अग्नि नामक राजा के पुत्र को रोहेडक नाम के नगर में क्रौंच नाम के वैरी द्वारा शक्ति नाम के शस्त्र से घायल किये जाने पर भी उन्होंने उसे सहन करते हुए उत्तम अर्थ को प्राप्त किया ।
सदासुखदासजी