काइंदि अभयघोसो वि चंडवेगेण छिण्णसव्वंगो ।
तं वेयणमधियासिय पडिवण्णो उत्तमं अट्ठं॥1559॥
काकन्दी में चन्द्रवेग ने छेद दिये थे सारे अंग ।
अभयघोष मुनि सही वेदना प्राप्त कर लिया उत्तम अर्थ॥1559॥
अन्वयार्थ : काकंदी नगरी में चंडवेग नाम के दुष्ट वैरी द्वारा सारा शरीर बाणों से छेदे जाने पर भी अभयघोष नाम के यतिराज ने उस उग्र वेदना को सहनकर उत्तम अर्थ/रत्नत्रयरूप आराधना को प्राप्त किया ।

  सदासुखदासजी