दंसेहिं य मसएहिं य खज्जंतो वेदणं परं घोरं ।
विज्जुच्चरोऽधियासिय पडिवण्णो उत्तम अट्ठं॥1560॥
डाँस मच्छरों द्वारा भक्षण किया गया विद्युच्चर का ।
घोर वेदना सहकर मुनि ने प्राप्त कर लिया उत्तम अर्थ॥1560॥
अन्वयार्थ : विद्युतच्चर नाम के मुनि दंशमशकों द्वारा खाये जाने पर भी घोर वेदना को संक्लेशरहित होकर सहन कर अपना उत्तम अर्थ/आत्मकल्याण साधकर मोक्ष को प्राप्त हुए ।

  सदासुखदासजी