गाढप्पहारविद्धो पूरंगलियाहिं चालणीव कदो ।
तध वि य चिलादपुत्तो पडिवण्णो उत्तमं अट्ठं॥1562॥
मुनि चिलातपुत्र के तन पर करें चीटियाँ डंक प्रहार ।
चलनी जैसा छेद दिया पर उनने पाया उत्तम अर्थ॥1562॥
अन्वयार्थ : चिलात पुत्र नाम के मुनि पर पूर्व भव के वैरी ने दृढ आयुधों से प्रहार किया, उससे उनके शरीर में घाव हो गये । उन घावों में बडे-बडे कीडे पड गये और उन कीडों ने चालनी के समान उनके पूरे शरीर में छिद्र कर दिये तो भी संक्लेश रहित होकर समभावों से वेदना को सहकर उत्तमार्थ/सर्वार्थसिद्धि को प्राप्त हुए ।

  सदासुखदासजी