
दंडो जउणवंकेण तिक्खकेडेहिं पूरिदंगो वि ।
तं वेयणमधियासिय पडिवण्णो उत्तमं अट्ठं॥1563॥
दण्ड मुनि पर यमुनावक्र नृपति ने किया बाण प्रहार ।
मुनि ने सही वेदना फिर भी प्राप्त किया था उत्तम अर्थ॥1563॥
अन्वयार्थ : यमुनावक्र नाम के दुष्ट पुरुष द्वारा छोडे गये बाणों से घायल हुआ है शरीर जिनका, ऐसे दंड नाम के मुनि समभावों से उस घोर वेदना को सहकर उत्तम अर्थ/आराधनारत्नत्रय को प्राप्त हुए ।
सदासुखदासजी