अभिणंदणादिया पंचसया णयरम्मि कुंभकार कडे ।
आराधणं पवण्णा पीलिज्जंता वि यंतेण॥1564॥
कुम्भकार कट नाम नगर में अभिनन्दन मुनि पाँच शतक ।
पेल दिया कोल्हू में फिर भी आराधना हुई संप्राप्त॥1564॥
अन्वयार्थ : अभिनंदन आदि पाँच सौ मुनिराज कुंभकारकट नाम के नगर में यंत्र/घाणी में पेले जाने पर भी रत्नत्रय की आराधना को प्राप्त हुए ।

  सदासुखदासजी