वसदीए पलिविदाए रिट्ठामच्चेण उसहसेणो वि ।
आराधणं पवण्णो सह परिसाए कुणालम्मि॥1566॥
रिष्ट मन्त्री ने कुणालपुर में वसतिका जला डाली ।
शिष्य सहित मुनि वृषभसेन को आराधना सुहाई थी॥1566॥
अन्वयार्थ : कुलाल नाम के नगर के बाह्यभाग में रिष्टाच्च (अरिष्ट) नाम के वैरी ने मुनियों से भरी वसतिका जला दी । उसमें मुनियों की सभा सहित वृषभसेन नाम के मुनि आराधना को प्राप्त हुए ।

  सदासुखदासजी