णिरयकडयम्मि पत्तो जं दुक्खं लोहकंटएहिं तुमं ।
णेरइएहिं य तत्तो पडिओ जं पाविओ दुक्खं॥1575॥
नरक बिलों में नारकियों ने लोह कील पर डाल दिया ।
और घसीटा तो जो दुःख भोगे उनका तुम करो विचार॥1575॥
अन्वयार्थ : नरकरूप कटक/सेना में तथा नरकरूप गढ्डेे में नारकियों द्वारा पटके गये ऐसे तुम, लोहमय कढाहों में दु:ख को प्राप्त हुए । उन नारकियों द्वारा दिये गये दु:खों का चिंतवन करो । यहाँ तुम्हारे रोगादि से तथा भूमियों के स्पर्श से उत्पन्न क्या दु:ख हैं? जिस कारण तुम अत्यंत कायर हो रहे हो?

  सदासुखदासजी