जं आवट्ठदो उप्पाडिदाणि अच्छीणि णिरयवासम्मि ।
अवयस्स उक्खया जं सतूलमूलायते जिब्भा॥1581॥
मस्तक के पिछले हिस्से से आँख निकाली असुरों ने ।
पराधीन कर पूरी जिह्वा गई उखाड़ी नरकों में॥1581॥
अन्वयार्थ : नरकों में तुम परवश हुए, नारकियों द्वारा तुम्हारा मस्तक छेदा गया, नेत्र उखाडे गये, सारी जिह्वा काटी गई है, उनका विचार करो ।

  सदासुखदासजी