
कुम्भीपाएसु तुमं उक्कढिओ जं चिरं पि वं सोल्लं ।
जं सुट्ठिउव्व णिरयम्मि पउलिदो पावकम्मेहिं॥1582॥
कुम्भीपाक नरक में तुमको ओंटाया गया चिरकाल ।
अंगारों पर गया पकाया शूल पिरोये मांस समान॥1582॥
अन्वयार्थ : हे मुने! तुम पापकर्म से महासंतापकारी कुम्भीपाक में बहुत काल तक ओंटाये गये हो तथा नरक में शूल में लगे मांस के समान अंगारों में सेंके - पकाये गये हो, उनका चिंतवन करो ।
सदासुखदासजी