
चक्केहिं करकचेहिं य जं सि णिकत्तो विकत्तिओ जं च ।
परसूहि फाडिओ ताडिओ य जं तं मुसंडीहिं॥1584॥
छेदे गये चक्र के द्वारा आरे से चीरा तुमको ।
पीटे गए थे मूसल द्वारा फरसे से फाड़ा तुमको॥1584॥
अन्वयार्थ : भो मुने! नरक में चक्रों के द्वारा छेदे गये हो, करोंतों से चीरे गये हो - कतरे गये हो, अनेकों खंडरूप किये गये हो, फरसों के द्वारा फाडे गये हो तथा मुसंडी मुद्गरों से ताडित किये गये हो । उसका चिंतवन करो ।
सदासुखदासजी