
पासेहिं जं च गाढं बद्धो भिण्णो य जं सि दुघणेहिं ।
जं खारकद्दमे खुप्पिओ सि ओमच्छिओ अवसो॥1585॥
मजबूती से बँधे पाँस से छिन्न भिन्न घन के द्वारा ।
पराधीन करके कीचड़ में नीचे मुँह कर था गाड़ा॥1585॥
अन्वयार्थ : हे मुने! तुम नरकों में पाश द्वारा कसकर बाँधे गये हो, घनों के द्वारा भेदे गये हो और परवश होकर क्षार कर्दम में नीचे मस्तक, ऊपर पैर करके गाडे गये हो, उन दु:खों को याद करो ।
सदासुखदासजी